मन्त्रलेखन

मन्त्र लेखन में एकाग्रता,मन की तन्मयता, आध्यात्मिक साधना में प्रगति स्थायी शान्ति का द्वार खुलकर, मन्त्र सिद्वि में सफलता मिलती है, तथा ध्यान करने का अभ्यास सुगम हो जाता है । मन्त्र लेखन आज से ही प्रारम्भ करे (शुभस्य शोघ्रम) । गायत्री मन्त्र लेखन से कठिन से कठिन संकट और भयानक से भयानक मूर्छा (मीरगी) पोलिया, फलुरसी, सग्रहणी,साईटिका,पागलपन, स्पाईब, टी.बी, गूंगापन, आॅखो की ज्योति दमा, नारु, एक्जिमा, प्रदर, जलोदर, चर्म, रोग, सफेद दाग जैसी बिमारियों का निवारण तथा चोरी में गई वस्तुएॅ और खोये हुए व्यक्ति की प्राप्ति के अतिरिक्त संतान प्राप्ति, परीक्षा में सफलता, नौकरी की उपब्धि एव मानसिक पीडा, गृहकलह, त्यापार बाधा, न्यायालय विवाद, कन्या विवाह, उपरी बाधा, प्रेत बाधा जैसे कष्टों से मुक्त होने के लिये गायत्री मन्त्रों का लेखन कर भक्त लाभान्वित हुए हैं और उन्होंने अपनी और से प्रशंसा–पत्र, प्रमाण–पत्र आादि दिये हैं जिनकी संख्या 50 हजार से अधिक है । मन्त्र लेखन एक महान साधना श्रद्वया यदि वैशुद्व क्रियतं मन्त्र लेखनम् । फल तर्हिभवेतस्यजपात् दश गुणाधिकमं यदि श्रद्वापूर्वक मन्त्र लिखे जायें तो जप से सौ गुना फलदेते हैं । मन्त्र लेखन से कायिक, वाचिक, मानसिक त्रिगुणात्मक (लेखनी) सरस्वती, (स्याही) महाकाली (पुस्तिका) महालक्ष्मी, त्रिदेाष पापों को नष्ट का मंत्र मे प्राण जाग्रती एवं शत्कि आत्मा मे प्रकाशित तथा एकागुणा होकर अनुपम लाभ मिलता है । उपरोक्त शास्त्र वचनों के अनुसार गायत्री मन्त्र लेखन (मन्त्राधिकारी हो कम पढे लिखे हो तो) राम नाम तथा अपने इष्ट मन्त्र भी लिख सकते है । तपोभूमि अवन्तिका में 25 अरब गायत्री मन्त्रों का संग्रह पॉच मन्जिला ब्राा गायत्री मन्दिर के दर्शन तथा आपकी मन्त्र लेखन पुस्तिकाओं की विधिवत् स्थापना नित्य पूजन के लिए ब्राा शक्ति गायत्री सिद्व पीठ अखंड दीपक देव तपो भूमि उज्जैन म.प्र. के पते पर भेजना उत्तम रहेगा तथा अभिमन्त्रित जल, भस्म, कवच प्राप्त करके हजारों व्यक्ति सुखी और सम्पन्न हुए हैं । मन्त्र लेखन के नियम मन्त्र लेखन करते समय गायत्री मन्त्र के अर्थ का चिन्तन करते हुए मनोजय एकाग्रतापूर्वक स्पष्ट व शुद्व लेखन करना चाहिये, मन्त्र लिखने के पहले गुरु गायत्री का ध्यान करते हुए एक सौ आठ मन्त्र श्री ब्राागायत्री (मन्दिर) अखण्ड दीपक तपोभूमि (उदू‍र्पुरा) मारुतिगंज, उज्जैन को प्रार्थना पत्र के रुप में भेंट करना चाहिये तथा प्रतिदिन 24 चौबीस मन्त्र या (यथा शक्ति) 109 एक सौ नौ क्रमांक से लेखन करने से नीचे लिखे लाभ होेते हैं । मॉ गायत्री छ: वर देती है, आयु की वृद्वि, अच्छा स्वास्थ्य, बाल बच्चे सुखी दूध देने वाले पशु, अन्नपूर्णा, कीर्ति, मनोच्छा द्रव तथा ब्र तेज की प्राप्ति होती है तथा ब्रलोक को प्राप्त हो जाता है ।

गायत्री पुरष्चरण–प्रयोग:–

इस हेतु हविश्यान्न भोजन, सत्यवचन, ब्रचर्य आदि व्रत का पालन करते हुए अच्छे मुहर्त मे तीर्थ स्थान (हो सके तो ) बिल्ब वृक्ष के नीचे या पास में बैठ कर हेमाद्रि संकल्प स्नान के पश्चात् संकल्प करके भूत षुद्ध प्राण प्रतिष्ठा तथा महानन्यासो को करके गणपत्यादि, गायत्री, ब्रणों का पूजन करके आचमन, प्रणायाम, शापविमोचन, 24 मूद्रायें और न्यास कर पुरष्चरण के 24 लाख जप हो जाने पर प्रधानमूर्ति गायत्री की बनाते हुए हवन में 24 हजार आहूति के बाद पूर्णाआहूति बलिदान आदि ग्रहशांति हेतु करेें अंत में जल से भगवान सविता की पूजा करके 2400 सौ बार सवितारं र्तपयामी बोलकर 2400 बार तर्पण करें फिर आत्मानमभिशिण्ंचामी नम: बोलकर अपने मस्तक का अभिषेक कर 24 ब्रणों को भोजन करावें।