अखण्ड दीपक
दीपक–फल–
बत्तीयों की गणना:–
1. एक बत्ती – मघ्यम फल।
2. दो बत्ती – कुटुंब एकता वृद्धि।
3. तीन बत्ती – पुत्र लाभ।
4. चार बत्ती – भूमि, पशु लाभ।
5. पांच बत्ती – धन, समृद्धि प्राप्त।
दिशा–
पूर्व:– सब तरह की बुराईया एवं ग्रहदोष का गमन।
पश्चिम:– ऋण बाधा, साझेदार की दुश्मनी तथा शनिदोष का निवारण होगा।
उत्तर:– धन समृद्धि, विवाह, मंगल कर्म निर्बाध होगा।
दक्षिण:– इस दिशा में दीप जलाना मना है।
विभिन्न तेल दीपक का फल:–
1. तिल का तेल :–सारे दोष, विपत्ती, बुराईया टलेगी।
2. अरंडी का तेल :–सूखपूर्ण वैवाहिक जीवन, एवं मानसिक शांति–सतुष्टि प्राप्त होगी
3. धृत (गाय का) :–सब प्रकार की धन समृद्धि और सुख प्राप्ति घर में सब शुभ होगा।
4.मुँगफली का तेल :–इसमें दीप जलाना मना है। व्यक्ति हमेशा ऋण बाधा से परेशान होगा।
देव विशेष तेल–
1. नारियल का तेल – गणपति जी
2. महुए का तेल – रुद्राणि देवता
3. तिल का तेल – नारायणादि देवता
4. धृत (गाय का) – महालक्ष्मी जी
5. पंचमिश्रित तेल – देवी के लिए उचित
मनोवांछित प्राप्ति हेंतु तेल–
1. यदि नीम का तेल, घी ओर महुए का तेल मिलाकर दीप जलाए तो कुलदेवता प्रसन्न होंगे।
2. यदि घी, अरंडी का तेल, नारियल का तेल, महुए का तेल तथा नीम का तेल मिलाकर 45 दिन तक जलाए तो देवीकृपा एवं मंत्र शक्ति प्राप्त होगी।
3. स्व–रोजगार, अच्छा पति और सुपुत्ऱ लाभ चाहंें तो शाम को दीप जलाकर महालक्ष्मी का पूजन करें।
4. प्रात: 4:30 से 6:00 के मध्य एवं शाम 5:30 से 6:30 के अंदर दीप जलाने से समृद्धि, मनोवंाछित फल एवं सर्वमंगल का योग बनता है।
शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धन सम्पदा।
शत्रु बुद्धि विनाशाय दीप ज्योति नमोस्तुते।।
नित्य प्रतिदिन शुभ और कल्याण की प्राप्ति करवाने वाले, आरोग्य एवं धन संपत्ति को प्रदान करने वाले शत्रुओं की बुद्धि का नाश करने वाले है। ज्योति स्वरुप दीप देवता आपको नमस्कार है।
शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धन सम्पदा।
मम बुद्धि प्रकाशंम विनाशाय दीप ज्योति नमोस्तुते।।
नित्य प्रतिदिन शुभ और कल्याण की प्राप्ति करवाने वाले, आरोग्य एवं धन संपत्ति को प्रदान करने वाले मेरी बुद्धि को प्रकाशमान करो, ज्योतिस्वरुप दीप देवता आपको नमस्कार है।
भो दीप देव रुपस्त्वं कर्मसाक्षी ह्यविन्घकृत्।
भाव पूजा समाप्ति: स्याताववत्र स्थिरो भव।।
है दीप देवता आपका रुप तेज सूर्य के समान है आप कर्म के साक्षी एवं विध्न हरणा है दीप देवता जब तक मैं पूजन करु तक आप अखण्ड प्रज्वलित रहो एवं स्थिर रहो।